NCB, IDV, First and Third Party, Zero Dep in Insurance

Motor Vehicle Insurance क्यों जरुरी है?

हम हमारे साथ होने वाली किसी दुर्घटना को नहीं रोक सकते लेकिन उसके द्वारा होने वाले नुकसान या हानि की भरपाई के लिए इंतजाम अवश्य कर सकते हैं।बीमा हमारी काफ़ी तरीके से मदद भी करता है । बहुत से लोग बीमा करवाते हैं लेकिन इसका लाभ लेना नहीं जानते । उनके लिए बीमा सिर्फ ट्रैफ़िक पुलिस से बचने का साधन मात्र है । लेकिन बीमा करवाने के काफी सरे फायदे होते हैं । अभी फिलहाल में लागू हुए Motor Vehicle act 2019 के बाद जैसा की खबरों में देख भी रहे हैं । काफ़ी लोगों के चालान हो रहे हैं । इस पोस्ट में आपको मोटर इन्सुरेंस से संबंधित सामान्य जानकारी मिलेगी ।

Types of Motor Insurance?

Motor Insurance सामान्यतः दो प्रकार की होती है

#1. Third Party Policy

सरकार के परिवहन नियमानुसार आपको अपने वाहन का Third Party Policy बीमा करवाना जरुरी होता है।Third Party Policy बीमा में क्या-क्या कवर रहता है?
इसमें सामान्यतः तीन चीजें कवर होती हैं:

(i) गाड़ी के मालिक के लिए Personal Accidental Cover for Owner / Driver

IRDAI (Insurance Regulatory Development Authority of India) के अनुसार आपको अपना पर्सनल एक्सीडेंटल बीमा करवाना जरुरी है । अगर आपने पहले से ही किसी दूसरे बीमा में (दूसरी गाड़ी के बीमा में ) या किसी लाइफ इन्सुरेंस / मेडिकल इन्सुरेंस कंपनी से यह बीमा करवाया हुआ है तो यह आपके लिए विकल्प होता है।दुबारा से इसे खरीदने या लेने की जरुरत नहीं है। लेकिन कम से कम R.s.15,00,000/- तक का पर्सनल एक्सीडेंटल कवर (Personal Accidental Cover for Owner / Driver ) पर्सनल एक्सीडेंटल बीमा होना जरुरी है।

(ii) Third Party Person के लिए Personal Accident Cover

अगर गाड़ी चलते वक्त आपसे किसी दुर्घटना में किसी तीसरे अनजान व्यक्ति की Death/मृत्यु हो जाती है तो उस स्तिथि में यह कवर आपकी सहायता करता है।इसके तहत मृत व्यक्ति के परिवार को बीमा कंपनी की तरफ से सहयोग धनराशि दी जाती है।यह कवर Third Party Insurance में आता है जोकि हर किसी के लिए लेना जरुरी होता है।

(iiii) Cover for Third Party Property

अगर गाड़ी चलते वक्त आपसे किसी दुर्घटना में किसी तीसरे अनजान व्यक्ति की संपत्ति की हानि हो जाती है तो उस स्तिथि में यह कवर आपकी सहायता करता है।इसके तहत उस संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए उसके मालिक को बीमा कंपनी की तरफ से संपत्ति की कीमत के अनुसार R.s.750,000/- तक की धनराशि दी जाती है।यह कवर भी Third Party Insurance में आता है जोकि हर किसी के लिए लेना जरुरी होता है।

#2. Comprehensive Policy (इसे First Party Insurance भी कहते हैं )

यह बीमा करवाना आपके लिए विकल्प होता है। यह Third Party Insurance से महंगा होता है क्यूंकि इसके लाभ ज्यादा होते हैं।आप करवाना चाहते हैं या नहीं यह सिर्फ आप पर निर्भर करता है।अगर आप यह बीमा नहीं करवाना चाहते हैं तो आपको सिर्फ तृतीय पक्ष का बीमा करवाना होगा।
इसमें सामान्यतः चार प्रकार के कवर होते हैं:

(i) आपका वाहन कवर रहता है (Cover to Your Vehicle)

अगर आपकी गाड़ी नयी है या फिर काफी महंगी गाड़ी है तो यह कवर लेना आपके लिए काफी फायदेमंद है।यह कवर आपकी गाड़ी को आकस्मिक दुर्घटना, प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप, भूस्खलन) इत्यादि से सुरक्षित करता है।आपकी गाड़ी अगर चोरी हो जाती है तब भी इसमें आपकी गाड़ी कवर रहती है।इस बीमा को लेते वक्त बीमा कंपनी आपकी गाड़ी की कंडीशन के अनुसार आपकी गाड़ी की एक कीमत (IDV- Insured Declared Value) निर्धारित करती है।बीमा की अवधि के दौरान आपकी गाड़ी में कोई भी नुकसान होता है तो आप दावा (Claim) कर सकते हैं।जिसके उपरांत IDV के अनुसार आपको कंपनी की तरफ से आर्थिक सहायता मिलती है।

(ii) गाड़ी के मालिक के लिए पर्सनल एक्सीडेंटल कवर (Personal Accidental Cover for Owner / Driver )

IRDAI (Insurance Regulatory Development Authority of India) के अनुसार आपको अपना पर्सनल एक्सीडेंटल बीमा करवाना जरुरी है । अगर आपने पहले से ही किसी दूसरे बीमा में (दूसरी गाड़ी के बीमा में ) या किसी लाइफ इन्सुरेंस / मेडिकल इन्सुरेंस कंपनी से यह बीमा करवाया हुआ है तो यह आपके लिए विकल्प होता है।दुबारा से इसे खरीदने या लेने की जरुरत नहीं है। लेकिन कम से कम R.s.15,00,000/- तक का पर्सनल एक्सीडेंटल कवर (Personal Accidental Cover for Owner / Driver ) पर्सनल एक्सीडेंटल बीमा होना जरुरी है।

(iii) तृतीय पक्ष व्यक्ति के लिए पर्सनल एक्सीडेंटल कवर

अगर गाड़ी चलते वक्त आपसे किसी दुर्घटना में किसी तीसरे अनजान व्यक्ति की Death/मृत्यु हो जाती है तो उस स्तिथि में यह कवर आपकी सहायता करता है।इसके तहत मृत व्यक्ति के परिवार को बीमा कंपनी की तरफ से सहयोग धनराशि दी जाती है।यह कवर Third Party Insurance में आता है जोकि हर किसी के लिए लेना जरुरी होता है।

(iv) Cover to Third Party Property

अगर गाड़ी चलते वक्त आपसे किसी दुर्घटना में किसी तीसरे अनजान व्यक्ति की संपत्ति की हानि हो जाती है तो उस स्तिथि में यह कवर आपकी सहायता करता है।इसके तहत उस संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए उसके मालिक को बीमा कंपनी की तरफ से संपत्ति की कीमत के अनुसार R.s.750,000/- तक की धनराशि दी जाती है।यह कवर भी Third Party Insurance में आता है जोकि हर किसी के लिए लेना जरुरी होता है।

# What is NCB (No claim Bonus in Motor Insurance

इसके बारे में थोड़ा बताना चाहता हूँ NCB या No Claim Bonus एक प्रकार का डिस्काउंट होता है। जब कोई वाहन का मालिक / बीमित व्यक्ति अपने बीमा की अवधि के दौरान कोई क्लेम नहीं लेता है तो उसे अगले साल की पॉलिसी लेते वक्त एक Discount दिया जाता है। अगर आप क्लेम नहीं लेते हैं तो डिस्काउंट का यह परसेंटेज, year-wise बढ़ता जाता है ।

NCB percentage year wise/how to check no claim bonus

  • आपने अगर पिछली साल की पॉलिसी पर क्लेम नहीं लिया है तो पॉलिसी रीन्यू (Renew) करते समय आपको 20% NCB डिस्काउंट मिलता है।
  • आपने अगर दो साल लगातार पिछली साल की पॉलिसी पर क्लेम नहीं लिया है तो पॉलिसी रीन्यू (Renew) करते समय आपको 25% NCB डिस्काउंट मिलता है।
  • आपने अगर तीन साल लगातार पिछली साल की पॉलिसी पर क्लेम नहीं लिया है तो पॉलिसी रीन्यू (Renew) करते समय आपको 35% NCB डिस्काउंट मिलता है।
  • आपने अगर चार साल लगातार पिछली साल की पॉलिसी पर क्लेम नहीं लिया है तो पॉलिसी रीन्यू (Renew) करते समय आपको 45% NCB डिस्काउंट मिलता है।
  • आपने अगर पांच साल लगातार पिछली साल की पॉलिसी पर क्लेम नहीं लिया है तो पॉलिसी रीन्यू (Renew) करते समय आपको 50% NCB डिस्काउंट मिलता है।
Note: Maximum NCB 50% ही रहेगा इससे ज्यादा NCB नहीं दिया जाता है। इसी बीच आप कभी भी अगर क्लेम करते हैं तो आपका NCB शून्य हो जाता है और यह फिर से 20% से शुरू होगा।

What is IDV (Sum insured)?

जब आप अपनी गाड़ी का बीमा करवाते हाँ तो इन्सुरेंस कंपनी में, यह आपके वाहन की कीमत होती है। अगर आपकी गाड़ी चोरी होती है या उसमे किसी भी प्रकार की क्षति होती है तो आपको इसी कीमत के अनुसार क्लेम मिलता है। बीमा खरीदते समय आपकी गाड़ी के Manufacturing/Registration year/cc of Engine/make and model of vehicle के अनुसार आपकी गाडी के लिए कम्पनी आपको एक न्यूनतम से अधिकतम की एक रेंज उपलब्ध करती है उसके बीच आप अपने मन से जितना IDV आपको अपनी गाड़ी का रखना है आप रख सकते हैं। जितना ज्यादा IDV आप चुनते हैं उतना ही प्रीमियम बनता है।

दोस्तों इस Post में मैंने आपको वाहन बीमा (Motor Vehicle Insurance) से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें Insurance Company में Customer Care Executive के तौर पर किये गए कार्य के अनुभव के आधार पर बताई हैं।उम्मीद करता हूँ आपको समझ आया होगा फिर भी अगर कोई सवाल है इन्सुरेंस से सम्बंधित तो आप कमेंट करके या हमे सीधा कांटेक्ट क्र सकते हैं।अगर आपको जानकारी उपयोगी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ Share करें।धन्यवाद् !

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